मुर्मु, मोदी , शाह, खरगे और अन्य नेताओं ने पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक जताया


नयी दिल्ली, 05 जुलाई (वार्ता) छत्तीसगढ़ की लोक कला पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक नेताओं ने रविवार को शोक व्यक्त करते हुए उनके निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने शोक संदेश में कहा कि पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय कला एवं संस्कृति जगत के लिए "अपूरणीय क्षति" बताया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में उनके योगदान को भी याद किया।
श्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलायी। उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।"
उन्होंने कहा, "दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ॐ शांति!" सुश्री तीजन बाई को देश की महान लोक कलाकारों में गिना जाता था। उन्होंने महाभारत की कथाओं पर आधारित पारंपरिक पंडवानी गायन शैली को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति, सशक्त कथावाचन और मंच संचालन शैली के कारण उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि यह कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय प्रतिक्षा और समर्पण से उन्होंने पंडवानी लोककला को विशिष्ट पहचान दिलाई। छत्तीसगढ़ की इस लोककला के संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोक कला, विशेषकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। श्री खरगे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई के निधन से भारतीय लोक कला, खासकर छत्तीसगढ़ के संस्कृति जगत ने अपनी एक विलक्षण प्रतिभा को खो दिया है। उन्होंने अपने ओजस्वी गायन और अद्भुत प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने दिवंगत कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शिष्यों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लोक कलाओं के क्षेत्र में अपनी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाली लोकप्रिय पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने शोक संदेश में कहा कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिक्षा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा पंडवानी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
इनके अलावा देश और प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भी डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा पंडवानी के संरक्षण और संवर्धन में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके परिजनों तथा असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
गौरतलब है कि देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था। वह 72 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्होंने रविवार सुबह लगभग 3:15 बजे अंतिम सांस ली। डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को अपनी सशक्त वाणी, प्रभावशाली अभिनय और विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से उन्होंने जीवंत बनाया। उनकी प्रस्तुतियों ने भारत के अलावा एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के दर्शकों को प्रभावित किया तथा छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई।
भारतीय लोककला में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण तथा 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. (डॉक्टरेट) की उपाधि से भी अलंकृत किया था। डॉ. तीजन बाई के निधन को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय लोककला के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी साधना और अद्वितीय कला के बल पर पंडवानी को गांव की चौपाल से विश्व मंच तक पहुंचाकर लोक परंपरा को नई पहचान दिलाई। उनके निधन से लोककला जगत ने अपना एक अमूल्य नक्षत्र खो दिया है।
उनका अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी संख्या में उमड़े लोगों, लोक कलाकारों, शिष्यों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नम आंखों से अंतिम विदाई दी। गनियारी स्थित मुक्तिधाम में हुए अंतिम संस्कार के दौरान पारंपरिक श्रद्धांजलि स्वरूप लोक कलाकारों और उनके शिष्यों ने "चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…" गीत गाकर वातावरण को भावुक कर दिया। अंतिम संस्कार की रस्म उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि देकर पूरी की। इस अवसर पर उनके पति तुलसी राम देशमुख भी उपस्थित रहे। परिजनों के अनुसार डॉ. तीजन बाई की अंतिम इच्छा थी कि वह सुहागिन के रूप में ही इस संसार से विदा लें।
अंतिम दर्शन के लिए कला, साहित्य और राजनीति जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां गनियारी पहुंचीं। इनमें पद्मश्री उषा बारले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार और उनके शिष्य शामिल रहे। सभी ने दिवंगत लोकगायिका को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें अंतिम प्रणाम किया।
डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और लोककला के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने पंडवानी गायन को अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। उनके निधन को लोककला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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