ऊना दलित उत्पीड़न मामले में आरोपियों के बरी होने पर मायावती चिंतित


लखनऊ, 7 अगस्त (वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने गुजरात के ऊना दलित उत्पीड़न मामले में स्थानीय अदालत द्वारा अधिकांश आरोपियों को बरी किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए गुजरात सरकार से उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।

सुश्री मायावती ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा, “ वर्ष 2016 में गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में दलितों पर हुए जघन्य अत्याचार के मामले में स्थानीय अदालत द्वारा मार्च में लगभग सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को आर्थिक और अन्य गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा, “ इस कड़वी सच्चाई से विशेष रूप से बहुजन समाज के लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है। इस मामले से चिंता का एक विशेष कारण यह भी है कि मैं स्वयं घटना के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने ऊना गई थीं। वहां वास्तविक स्थिति का पता लगाने के बाद मैने राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की थी।”
बसपा प्रमुख ने कहा कि देशभर में विरोध और आक्रोश के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों के बरी हो जाने की खबर दलितों के प्रति सरकारी उपेक्षा और उनके हितों तथा सुरक्षा के प्रति लापरवाही का परिणाम प्रतीत होती है। अभी भी गुजरात सरकार के पास अपनी भूल सुधारने का अवसर है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह हाईकोर्ट में इस मामले की प्रभावी पैरवी कर सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगे।
उन्होने यह भी मांग की कि गुजरात सरकार पीड़ित परिवारों की इच्छा के अनुसार सरकारी खर्च पर सक्षम वकीलों की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान गरीबों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान किया गया था और इसी प्रकार की व्यवस्था गुजरात में भी की जानी चाहिए।

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