सात साल से कम सजा वाला लंबित मुकदमा चरित्र प्रमाणपत्र रोकने का आधार नहीं


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी:) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सात साल से कम सजा वाले किसी लंबित आपराधिक मुकदमे को महज आधार बनाकर चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता। 

          न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा  और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने झांसी के जिलाधिकारी का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही याची राम सरन साहू का चरित्र प्रमाणपत्र दो हफ्ते में जारी करने का आदेश दिया है।

        याची ने चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराने का आवेदन डीएम कार्यालय में दाखिल किया था। जिलाधिकारी ने आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याची के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा ट्रायल कोर्ट में लंबित है। उसमें आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। इसके खिलाफ याची ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

      याची के अधिवक्ता ने प्रदेश सरकार के नौ अप्रैल 2026 को शासनादेश व उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला दिया। दलील दी कि याची के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमे में भले ही आरोप पत्र दाखिल हो चुका हैए लेकिन संबंधित अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। चरित्र प्रमाणपत्र जारी नहीं करना अवैधानिक है।

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