मायावती ने बसपा पदाधिकारियों को दिए संगठन मजबूत करने के निर्देश, आरएसएस पर साधा निशाना
लखनऊ, 3 सितंबर ( वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बृहस्पतिवार को पार्टी की आल इंडिया बैठक में संगठन एवं आंदोलन से जुड़े पिछले कार्यों की समीक्षा की और आगामी कार्यक्रमों के लिए पदाधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पार्टी के संस्थापक कांशीराम के त्याग, तपस्या और समर्पण को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।बसपा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, मायावती ने कहा कि पार्टी और आंदोलन से जुड़े पिछले कार्यों की समीक्षा कर कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिए गए दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के हित, कल्याण और उसकी अस्मिता के लिए समर्पित कर दिया था।
सुश्री मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार, रिश्ते-नाते और सुख-सुविधाओं को त्यागकर देश के कोने-कोने में जाकर लोगों को जागरूक किया और उन्हें संगठित किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए वह भी पूरी निष्ठा और त्याग की भावना से काम करती रही हैं।
उन्होने कहा कि कांशीराम के संघर्ष को बसपा सरकार ने विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में पूरा करने का प्रयास किया तथा उनके मान-सम्मान और ऐतिहासिक योगदान को गौरवशाली बनाया, जो लोगों की जुबान पर होने के साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के आदर्शों और उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली पार्टी बसपा का उद्देश्य सत्ता की मंजिल तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने भी इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी थी।
बसपा प्रमुख ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे में की गई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस प्रमुख ने कई बातें कहीं, लेकिन मायावती के मुताबिक उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने जातिवाद और असमानता के खिलाफ आजीवन कड़े संघर्ष किए थे।
उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने इसी संघर्ष के बल पर एससी, एसटी और अन्य पिछड़े वर्गों तथा वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उन्होने आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दलितों और वंचितों के साथ-साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान-माल एवं महिलाओं से जुड़े मामलों में आरएसएस और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर नजर आता है। उन्होंने कहा कि इससे इन वर्गों में विश्वास की कमी पैदा होती है।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब आंबेडकर के मानवतावादी और समतामूलक संविधान पर पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से अमल करना चाहिए तथा अपने लोगों पर भी उसी प्रकार के संस्कार डालने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और समाज में वास्तविक एकता तथा भाईचारा तभी मजबूत होगा, जब सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार हो।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से देश-दुनिया के ज्वलंत मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करने तथा बहुजन समाज के हितों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि बसपा अपने संगठन को मजबूत करते हुए आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी।

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