विपक्ष की तगड़ी चुनौती के बीच नितिन नवीन भाजपा के उपेक्षित और मायूस समर्थकों की बढ़ा गए उम्मीद
सहारनपुर, 23 सितंबर (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने पहले पश्चिम के दो दिवसीय दौरे के दौरान पार्टी के निराश, हताश और उपेक्षित समर्थकों और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों और आंकाक्षाओं को बढ़ाने का काम सफलतापूर्वक किया है। उनके कामकाज की शैली और संगठन कौशल में अमित शाह और सुनील बंसल की झलक देखी जा रही है।मेरठ और सहारनपुर में उनकी बैठकों में शामिल हुए पूर्व एवं वर्तमान जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों ने बुधवार को यूनीवार्ता को बताया कि उन्हें 2014 का लोकसभा चुनावों का मंजर याद आ गया। जब उत्तर प्रदेश प्रभारी के रूप में मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह ने यहां उनके बीच आकर मंथन किया और लोगों को चुनाव के लिए तैयार किया था जिसके नतीजे में भाजपा ने ना केवल लोकसभा चुनावों में बल्कि 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पहले पायदान पर स्थापित कर दिया था।
सियासी हालात पर नजर रखने वाले पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर योगेश गुप्ता कहते हैं कि पश्चिम के सियासी रूप से जागरूक पश्चिम के दौरे पर निकलने से पहले ही निश्चित ही नितिन नवीन ने अमित शाह और सुनील बंसल जैसे यहां के जानकारों के साथ खुद को उसी सांचे में ढालने का का किया। यही वजह है कि उनका यहां के तमाम भाजपाइयों पर चुंबकीय प्रभाव दिखा।
नितिन नवीन के दौरे से कई बातें साफ हो गई। पहली यह है कि संगठन का हाल बिल्कुल भी दुरूस्त नहीं है और भाजपा के जनप्रतिनिधियों से आमजन ही नहीं उनके कार्यकर्त्ताओं के मन में भी भारी निराशा घर कर गई है। हर मीटिंग में नितिन नवीन ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी की मौजूदगी में बैठक में आए हर व्यक्ति से हालात की जानकारी ली पर किसी ने भी कोई सकारात्मक बात नहीं कही जिसने नितिन नवीन को गहरे से चौंकाया।
उन्होंने पार्टीजनों को इस स्थिति से बाहर आने और उत्साह और उमंग के साथ चुनाव तैयारियों में लग जाने की भावुक अपील की और कहा कि भाजपा एक परिवार है। उन्होंने भरोसा दिया कि वे सभी संबंधित से बात कर उनकी उपेक्षा दूर कराने, सहयोग और सम्मान दिलाने और नए उम्मीदवारों के चयन में निश्चित ही उनकी भावनाओं का ख्याल रखेंगे। उनके इस मंत्र से तात्कालीक रूप से भाजपाई आशान्वित जरूर हुए लेकिन वह देखेंगे कि इन मीटिंगों के नतीजे कितनी जल्दी और कितने प्रभावशाली रूप में सामने आते हैं।
श्री अमित शाह की विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति के तहत बहुत बड़ी संख्या में कांग्रेस, सपा, बसपा के प्रभावशाली नेता भाजपा में शामिल हुए। सहारनपुर में ही पूर्व मंत्री साहब सिंह सैनी, पूर्व मंत्री डा. धर्मसिंह सैनी, पूर्व मंत्री संजय गर्ग, पूर्व विधायक महिपाल माजरा, पूर्व विधायक रविंद्र सिंह मोल्लू, पूर्व विधायक जगपाल सिंह को पार्टी ने कहीं भी समायोजित नहीं किया है। ऐसे ही दूसरे दलों से आए नेताओं में मायूसी गहरे से पनप रही है। जाटों के प्रमुख नेता और बघरा मुजफ्फरनगर के पूर्व विधायक प्रदीप बालियान जो कभी भाकियू नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के हर दम साथ रहते थे, भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए हैं। अन्य नेता भी सही वक्त आने की फिराक में लगे हैं। यदि भाजपा में उनकी पूछ नहीं होती है तो वे नई राह पकड़ेंगे।
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