उत्तर प्रदेश की 15,890 प्राचीन पांडुलिपियां डिजिटल स्वरूप में संरक्षित
लखनऊ, 13 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश की प्राचीन साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ज्ञान भारतम मिशन के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करा रही है।प्रदेश के छह प्रमुख संस्थानों में अब तक 15,890 पांडुलिपियों के 7,56,392 पृष्ठों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से 14,594 पांडुलिपियों का विवरण तैयार किया गया है, जबकि 14,208 अभिलेख डिजिटल मंच पर अपलोड किए जा चुके हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल प्राचीन दस्तावेजों को स्कैन करना नहीं, बल्कि उनमें समाहित ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखना तथा भावी पीढ़ियों के लिए उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य एवं इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री तक पहुंचने में सुविधा होगी। वृंदावन शोध संस्थान, मथुरा में 3,161 पांडुलिपियों के 1,93,256 पृष्ठों की स्कैनिंग पूरी की गई है। इनमें से 2,998 पांडुलिपियों का विवरण तैयार किया गया और 2,846 अभिलेख डिजिटल मंच पर अपलोड किए गए हैं।
हिंदी साहित्य सम्मेलन में 2,400 पांडुलिपियों के 1,26,878 पृष्ठों को स्कैन किया गया है। यहां 2,090 पांडुलिपियों का विवरण तैयार करने के साथ 2,023 अभिलेख अपलोड किए गए हैं। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 1,192 पांडुलिपियों के 90,300 पृष्ठों की स्कैनिंग की गई है और 759 अभिलेख अपलोड किए गए हैं। राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में 1,623 पांडुलिपियों के 1,52,519 पृष्ठों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। यहां 1,472 पांडुलिपियों का विवरण तैयार किया गया है और 1,410 अभिलेख अपलोड किए जा चुके हैं।
नागरी प्रचारिणी सभा में 6,720 पांडुलिपियों के 61,175 पृष्ठों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। यहां 6,680 पांडुलिपियों का विवरण तैयार किया गया है और 6,600 अभिलेख डिजिटल मंच पर अपलोड किए गए हैं। वहीं, गोरखपुर स्थित गीता प्रेस में 794 पांडुलिपियों के 1,32,264 पृष्ठों की स्कैनिंग की गई है। इनमें से 595 पांडुलिपियों का विवरण तैयार करने के साथ 570 अभिलेख अपलोड किए गए हैं।
जयवीर सिंह ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियां देश की ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। समय के साथ पुराने दस्तावेजों के क्षतिग्रस्त होने या नष्ट होने का खतरा रहता है। ऐसे में उनका डिजिटल संरक्षण महत्वपूर्ण है। प्रत्येक पांडुलिपि का व्यवस्थित विवरण तैयार होने से उससे संबंधित जानकारी को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से खोजने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग कर उत्तर प्रदेश की साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियों को प्राचीन ज्ञान परंपराओं से जोड़ने के साथ शोध और अध्ययन के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।
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