डाक नही पहुंचने पर चयन से बाहर यही कर सकते : उच्च न्यायालय


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया में आवेदन की हार्ड कॉपी डाक से पहुंचने में देरी को लेकर  कहा कि अभ्यर्थी ने ऑनलाइन आवेदन और शुल्क समय पर जमा कर दिया हो और विज्ञापन में तय अवधि के भीतर हार्ड कॉपी भी डाक से भेज दी हो, तो डाक विभाग की देरी के कारण उसे चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता।

        न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अनुराधा की याचिका स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वह 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे तक उनकी हार्ड कॉपी स्वीकार करे। इसके बाद विज्ञापन की शर्तों और लागू नियमों के मुताबिक उनकी उम्मीदवारी पर विचार किया जाए। न्यायालय ने कहा कि अभ्यर्थी की लापरवाही साबित हुए बिना डाक की देरी का खामियाजा उसे भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।।             

       चिकित्सा शिक्षा विभाग के पदों पर भर्ती के लिए 18 अगस्त 2026 को विज्ञापन जारी हुआ था। चयन साक्षात्कार के आधार पर होना था। ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख 1 सितंबर थी , जबकि जरूरी दस्तावेजों के साथ हार्ड कॉपी 15 सितंबर को शाम 5 बजे तक आयोग के कार्यालय पहुंचनी थी। इसके लिए रजिस्टर्ड डाकए स्पीड पोस्ट या व्यक्तिगत रूप से आवेदन जमा करने की अनुमति थी।

         याचिकाकर्ता अनुराधा ने 31 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन करने के साथ शुल्क जमा कर दिया। उन्होंने 8 सितंबर को रजिस्टर्ड डाक से हार्ड कॉपी भेजीए लेकिन वह 16 सितंबर को आयोग के इलाहाबाद स्थित कार्यालय पहुंची। यानी तय समय से एक दिन बाद। आयोग ने आवेदन स्वीकार करने के बजाय लिफाफे पर टिप्पणी दर्ज कर उसे लौटा दिया। 21 सितंबर को आवेदन वापस मिलने के बाद अनुराधा ने आयोग के सामने अपनी बात रखी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

             अनुराधा को डाक विभाग से जानकारी मिली कि 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के कारण दिल्ली और नई दिल्ली के डाक कार्यालय 11 से 13 सितंबर 2026 तक बंद रहे थे। इसके बाद उन्होंने 30 सितंबर को आयोग को अभ्यावेदन देकर देरी की वजह बताई।

            अनुराधा को डाक विभाग से जानकारी मिली कि 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के कारण दिल्ली और नई दिल्ली के डाक कार्यालय 11 से 13 सितंबर 2026 तक बंद रहे थे। इसके बाद उन्होंने 30 सितंबर को आयोग को अभ्यावेदन देकर देरी की वजह बताई।

        आयोग की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित समय सीमा के बाद पहुंची हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जा सकती। हालांकि,  उच्च न्यायालय ने डाक की ट्रैकिंग रिपोर्ट देखी तो पाया कि अनुराधा ने दस्तावेज समय रहते भेज दिए थे। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिलाए जिससे उनकी ओर से लापरवाही साबित होती हो।

    उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के आशुतोष अग्निहोत्री बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अन्य मामले का उल्लेख किया। उस मामले में भी आवेदन स्पीड पोस्ट से समय पर भेजा गया था, लेकिन संबंधित कार्यालय में एक दिन देर से पहुंचा। उच्चतम न्यायालय ने देरी के आधार पर आवेदन खारिज करने का फैसला निरस्त कर दिया था।

        पीठ ने सदफ इमरान बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और ऋषिश प्रकाश बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग मामलों में अपनाए गए सिद्धांतों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि जब अभ्यर्थी ने निर्धारित माध्यम से समय पर दस्तावेज भेजे हों और उसकी लापरवाही सामने न आई हो, तो डाक पहुंचने में देरी को चयन से बाहर करने का अपने आप में वैध आधार नहीं माना जा सकता।

     न्यायालय ने कहा कि जब भर्ती प्राधिकरण खुद रजिस्टर्ड डाक और स्पीड पोस्ट से आवेदन भेजने की अनुमति देता है, तो उससे जुड़ी अप्रत्याशित देरी की पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी पर नहीं डाली जा सकती। ऐसा करना प्रक्रिया संबंधी शर्त को उसके अधिकार से वंचित करने का जरिया बनाने जैसा होगा।

          उच्च न्यायालय ने आयोग की ओर से हार्ड कॉपी लौटाने को गलत ठहराते हुए अनुराधा को 16 अक्टूबर 2026 की शाम 5 बजे तक दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया। आयोग को निर्देश दिया गया कि हार्ड कॉपी स्वीकार कर रिकॉर्ड में शामिल करे और भर्ती के नियमों के अनुसार उनकी उम्मीदवारी पर विचार करे।

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