आईआईटी-बीएचयू ने विकसित की बैक्टीरिया से लड़ने की नई तकनीक

 


वाराणसी, 09 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के दो शोध समूहों ने बैक्टीरियाई संक्रमण से मुकाबले के लिए प्रकाश आधारित नई तकनीक विकसित की है। हरी रोशनी से सक्रिय होने वाली यह तकनीक बैक्टीरिया की वृद्धि रोकने के साथ संक्रमण फैलाने वाली सुरक्षात्मक परत को भी नष्ट करने में प्रभावी पाई गई है। शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'कम्युनिकेशंस केमिस्ट्री' में प्रकाशित हुआ है।

संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साम्या बनर्जी और जैव-चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. सुदीप मुखर्जी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में ऑस्मियम आधारित तीन विशेष रासायनिक यौगिक विकसित किए गए हैं। इन्हें प्रकाश-सक्रिय धातु-आधारित जीवाणुरोधी यौगिक कहा जाता है। हरी रोशनी के संपर्क में आने पर ये प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन अणु उत्पन्न करते हैं, जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
शोध में ई. कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस और बैसिलस सब्टिलिस जैसे बैक्टीरिया पर इन यौगिकों का परीक्षण किया गया। इनमें ओएस-1 ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। हरी रोशनी के साथ इसके इस्तेमाल से ई. कोलाई और बैसिलस सब्टिलिस की जैव-परत में करीब 85 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। पहले से बनी परिपक्व जैव-परत पर भी इसका प्रभाव देखा गया।
बैक्टीरिया से संक्रमित घावों वाले चूहों पर किए गए परीक्षण में ओएस-1 और हरी रोशनी से उपचार के 11वें दिन घाव करीब 99 प्रतिशत तक भर गए। यह शोध दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में बढ़ते प्रतिरोध से निपटने की दिशा में नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। हालांकि, मानव उपचार में इसके इस्तेमाल से पहले दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया पर व्यापक परीक्षण और दीर्घकालिक सुरक्षा अध्ययन आवश्यक होंगे।

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