दीपोत्सव में सजेगा लोक संस्कृति का महाकुंभ, कई राज्यों के कलाकार रामनगरी में बिखेरेंगे लोककला के रंग

 


लखनऊ, 04 नवंबर ( वार्ता) अयोध्या में दीपोत्सव-2026 इस बार दीपों की जगमगाहट के साथ देश की विविध लोक संस्कृतियों के रंगों से भी सराबोर होगा। रामनगरी की सड़कों से लेकर सांस्कृतिक मंचों तक देशभर के लोक कलाकार अपनी पारंपरिक नृत्य और संगीत विधाओं की प्रस्तुतियां देंगे।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कलाकार अपनी क्षेत्रीय लोककलाओं के जरिए दीपोत्सव को सांस्कृतिक महाकुंभ का स्वरूप देंगे।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में मथुरा का मयूर और बम रसिया, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा तथा सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही और डमरू एवं शंख नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं से परिचित कराएगा।

उन्होंने बताया कि दीपोत्सव में दूसरे राज्यों की लोककलाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। पश्चिम बंगाल के कलाकार श्रीखोल, ओडिशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन की प्रस्तुति देंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

इसी क्रम में राजस्थान का घूमर और चरी, बिहार की झिझिया, चेन्नई का कावड़ी, कड़गम एवं मयूर नृत्य और आंध्र प्रदेश का बोनालू भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे।

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को देश के अलग-अलग हिस्सों की वेशभूषा, संगीत, नृत्य शैली और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

दीपोत्सव की शोभायात्रा में भी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव की रौनक बढ़ाएंगे। इसमें प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल एवं सिंघा और अयोध्या का बधावा नृत्य शामिल होगा। वहीं आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन प्रस्तुत करेंगे।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य पारंपरिक लोककलाओं को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में दीपों की रोशनी के साथ लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की छटा रामनगरी को विशिष्ट पहचान देगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अनेक राज्यों से आने वाले कलाकार अयोध्या को सांस्कृतिक संगम का स्वरूप देंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय संस्कृति की विविधता, परंपरा और एकता का संदेश प्रसारित होगा।

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